गुरुवार, 16 जनवरी 2025

पुस्तक समीक्षा - चाँदपुर की चंदा

 

Chandpur Ki Chanda । चाँदपुर की चंदाChandpur Ki Chanda । चाँदपुर की चंदा by Atul Kumar Rai
My rating: 5 of 5 stars

ग्राम जिसमें एक समाज रहता है, उस समाज के युवा जब राजनीति के शिकार होकर दिशाहीन होते हैं; तब गांव में खिलते पुष्पों का जीवन दूभर हो जाता है। एक ऐसे ही ग्रामीण जीवन में खिलते प्रेम की कथा है "चाँदपुर की चंदा"।

समाज जिसे मानव सभ्यता का आधार माना गया था, जिसका कार्य था एक दूसरे के सुख दुख में साथ निभाना। जब वही समाज एक दूसरे को सुखी देख जलने भुनने लगे तब दूषित हो उठता है।

अपनी राजनीति को चमकाने में लगे युवा नेता, जब गांव के युवाओं को नशे में डुबाने लगें, तब उस गांव का दम घुटने लगता है।

इस तरह का माहौल आज हर गांव का है। ऐसे ही गांव में जब दो युवाओं के हृदय में प्रेम के पुष्प खिलते हैं, तो बदनाम करने वाली सहस्त्रों आवाज़ गूंजने लगती हैं।

चंदा के हृदय में भी शशि के लिए प्रेम जागा है। पर उसने गांव की बेटियों को दहेज़ के बोझ में झुलसते भी देखा है। वह चाहती है गांव की बेटियों को पढ़ाना, उन्हें सशक्त बनाना।

इसी चाह और हृदय की गांठ को सुलझाती कहानी है, चंदा की।

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