ये २४ पन्ने की बहुत छोटी सी कहानी है, पर इसमें जो प्रेम
कथा है, वह सर्वश्रेष्ठ है। पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी
ने अपने छोटे से जीवन में चंद ही कहानियां लिखीं, और हिन्दी
कहानी लेखन में उनकी कहानियों को ही शायद प्रथम कहानी के रूप में समीक्षकों ने जगह दी है।
कई
समीक्षकों ने इनकी कहानियों की समीक्षा लिखी और आलोचना भी, इनकी कहानियों को हिन्दी साहित्य जगत
में एक अग्रिम स्थान प्राप्त हुआ है। २०१४ के वर्ष में इस कहानी (उसने कहा था) ने
१०० वर्ष पूरे किए हैं।
अमृतसर
शहर में उस समय गाड़ी इक्कोवालों का शोर अधिक सुनाई पड़ता था, अब बड़ी बड़ी मोटरकार आ गईं हैं सड़कों
पर। गाड़ी-इक्कोवाली भीड़ से सड़क पार कर एक लड़की और लड़का चौक की दुकान पर आ
मिले, दोनों शायद छुट्टियों में मामा के घर आये थे।
उस
दुकान का मालिक किसी अन्य ग्राहक के साथ व्यस्त था,
तब इन दोनों बच्चों को जिसमें लड़के की उम्र १२ है और लड़की ८ वर्ष
की है, बात करने का समय मिल जाता है। सौदा लेने के बाद चलते
समय लड़का लड़की से पूछता है, 'तेरी कुड़माई हो गयी'
, और लड़की 'धत्त' कहती
हुई भाग जाती है।
ऐसे
ही कभी दूध की दुकान पर तो कभी किसी सब्जी वाले के यहाँ वह मिल जाते तो लड़का यही
सवाल पूछता लड़की से, 'तेरी
कुड़माई हो गयी' और लड़की धत्त बोलकर भाग जाती।
एक
दिन लड़की ने लड़के की संभावना के विरुद्ध कहा - 'हाँ हो गई।' 'कब' 'कल; देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू।' लड़की भाग गई।
लड़के
ने भी घर की राह पकड़ी, पर
उसके मन में कई उधेड़बुन चल रही थीं, उसी में उसने एक कुत्ते
को पत्थर मारा, एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया। सामने नहाकर
आती हुई किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाई। तब जाकर कहीं घर पहुँचा।
बड़ा
होने पर लड़का फ़ौज में भरती हो जाता है,
प्रथम विश्व युद्ध छिड़ जाने से उसकी पलटन को जर्मन फ़ौज से लोहा
लेने के लिए विदेश में कहीं भेजा गया है। वह कहता है यहाँ लुधियाना से दस गुना
अधिक गलन है, इससे अंदाज़ा मिलता है किसी ठंडे प्रदेश में
उनकी पलटन जंग में डटी है।
युद्ध
में जिस समय वह आ रहा था, तब
संयोग से उसी लड़की से उसकी मुलाक़ात होती है, अब वह किसी की
औरत है, उसका पति और लड़का भी इस लड़के के साथ उसी पलटन में
जंग के लिए जा रहे हैं। इस समय लड़की इस लड़के से कुछ कहती है, और उसी वचन को निभाते हुए ये लड़का जंग को चला जाता है।
'उसने कहा था' , बचपन में जिस लड़की से वह मिला था और फिर कई वर्षों तक उसने कभी उसे नहीं देखा आज जंग के मैदान में उसे वह याद आ जाती
है। जंग में वह घायल हो जाता है और अपनी अंतिम सांस ले रहा है, पर उसे इस बात की संतुष्टि है कि उसने उसे दिए वचन को पूरा किया।










![अक्षरों के साये [Aksharon Ke Saye]](https://i.gr-assets.com/images/S/compressed.photo.goodreads.com/books/1497514840l/35438959._SX98_.jpg)
