मंगलवार, 5 जुलाई 2022

The Coalition Years - Pranab Mukherjee

भारतीय राजनीती के कुछ अनमोल संस्मरणों को प्रणब मुख़र्जी जी ने अपनी लेखनी से संवारा है। राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करते हुए, उन्हें याद आते हैं भारत की राजनीति में बिताये वो ४६ वर्ष जिनका आरंभ फरवरी १९६६ से हुआ था। अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्हें गर्व होता है कि एक साधारण गांव का लड़का जो कभी तेल के दिये की रोशनी में जीता था, आज एक ऐसे भवन में प्रवेश कर रहा है जहाँ कई रोशनी के झूमर जगमगा रहे हैं। अपने जीवन के इन अनमोल पलों को याद करते हुए वे लिखते हैं कि, ये भारत के संविधान की शक्ति ही है जो एक साधारण से व्यक्ति को भी राष्ट्र का सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बना सकता है।

"My Entry into Rashtrapati Bhavan on the afternoon of 25 July 2012 marked the end of my 46 year old political career which began in February 1966. It had indeed been a long and arduous journey."

"I also mentioned that the rise of a village boy from flickering oil lamps in an obscure village, to the blazing chandeliers of the high dome of Raisina Hill, symbolizes the strength of Indian Democracy and its pervasiveness."

The Coalition Years, भारतीय राजनीति में आया वह दौर है जब गठबंधन से सरकारें चलना आरंभ हुआ। इसमें प्रणब दा १९९६ से २०१२ तक की राजनीति के प्रमुख घटनाक्रमों का वर्णन करते हैं। यही वह वर्ष हैं जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का प्रवेश भारतीय राजनीती में आरंभ हुआ। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने १९९८ से २०१४ तक अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में एक सफ़ल गठबंधन की सरकार चलाकर ये सिद्ध कर दिया कि गठबंधन के बल पर भी सफ़ल सरकार चलायी जा सकती है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का आरंभ २००४ के चुनावों से आरंभ हुआ और इसने १० वर्ष तक एक सफ़ल सरकार केंद्र को दी।

संयुक्त प्रतिशील गठबंधन की सरकार में प्रणब मुख़र्जी जी ने रक्षा मंत्री,वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के रूप में अपनी सेवायें दीं। रक्षा, वित्त एवं विदेश मंत्री के रूप में जो कार्यकाल प्रणब दा ने संभाला, उन्हीं संस्मरणों को उन्होंने इस पुस्तक में शब्दरूप किया है। राष्ट्र राजनीति में प्रभावशाली पदों पर रहकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किया, और उन्हें अपने परिश्रम से पूर्ण किया। आधार पहचान पत्र, वस्तु एवं सेवा कर (GST), लोकपाल इत्यादि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को उन्होंने संसद में चर्चा में लाया और उनपर कार्य किया। इन्हीं सब कार्यों के संस्मरणों को इन्होंने इस पुस्तक में लिखा है, जो भारतीय राजनितिक इतिहास को जानने और समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्ताबेज का रूप दिया है।

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