गुनाहों का देवता by Dharamvir BharatiMy rating: 5 of 5 stars
इस उपन्यास में सब कुछ है, वेदना है, दर्द है, प्यार है, हसी है सब है एक सम्पूर्ण उपन्यास है. प्रेम की गहराहियों तक जाके छूकर निकल गए हैं धर्मवीर भारती इस उपन्यास द्वारा. प्रेम साधना और भोग साधना का संतुलन जिस तरह से प्रस्तुत किया है, बहुत ही उत्तम है. पम्मी का पत्र में उसने पूरा जीवन जी लिया है. कहानी का हर पात्र, खुद को समझने और समझाने की कोशिश कर रहा है.
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