शनिवार, 20 नवंबर 2021
एक स्वर सहस्त्र प्रतिध्वनियाँ - समीक्षा
शनिवार, 30 अक्टूबर 2021
समीक्षा: लेबंटी चाह
Lebanti Chah by Abhishek OjhaMy rating: 5 of 5 stars
पढ़ डालिए बस
बहुत कम पुस्तकें आपको अपने से जोड़ पातीं हैं, ये ऐसी ही पुस्तक है जिससे आप जुड़ते चले जाओगे। बचपन से जवानी तक का सफ़र सब आंखों के सामने प्रकट होने लगता है। इतना ही कहेंगे, हाथ लगे तो पढ़ डालिए बस।
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Review: MOSAIC

समीक्षा: गंजहों की गोष्ठी

साकेत जी 'गंजहों की गोष्ठी' करवा रहे हैं जिसमें आज की राजनैतिक व्यवस्था को लेकर चर्चा केंद्र में है, और बहुत ही व्यंग्यात्मक लेखनी के साथ साकेत जी ने हमारे लोकतंत्र की वर्तमान व्यवस्था का वर्णन किया है।
समीक्षा: महामानव सरदार

मुझे लगता है लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और उनके राजनैतिक संघर्ष के विषय में इससे अधिक स्पष्ट और सटीक जानकरी प्रदान करती अन्य कोई पुस्तक नहीं हो सकती। दिनकर जोशी जी एक ऐसे लेखक हैं, जो हर विषय को गहरायी में समझते हैं और उस पर लिखते हैं। उनके द्वारा लिखीं महाभारत पर आधारित पुस्तकें पढ़कर आप महाभारत को अच्छे से समझ सकते हैं। उसी प्रकार से उन्होंने गाँधी जी के विषय में भी लिखा है। सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े हर विषय को जिस समझदारी और स्पष्टता से यहाँ समझने समझाने का प्रयास हुआ है, वो लेखक की प्रतिभा को दर्शाता है।
आप यदि आधुनिक भारत के इतिहास को समझना चाहते हैं तो ये पुस्तक अवश्य पढ़ें.....
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021
Review: Unsung Valour: Forgotten Warriors of the Kurukshetra War

अर्जुन और नाग कन्या उलूपी के पुत्र इरावन से प्रथम अध्याय शुरू होता है, इरावन अपने पिता का बड़ा प्रतापी पुत्र था। आठवें दिन के युद्ध में राक्षस अलम्बुष से युद्ध करते हुए, बड़ी वीरता का प्रदर्शन किया था इरावन ने। राक्षसों की मायावी विद्या को नाग कन्या पुत्र होने के कारण अपनी विद्या से कड़ी टक्कर दी थी इन्होंने।
अलम्बुष, बकासुर का भाई था, जिसे भीम ने वन वास के समय में मारा था, उसी का बदला लेने के लिए अलम्बुष ने कौरव सेना का साथ दिया।
शकुनि को आप किस तरह और कितना जानते हैं, १८ दिन के युद्ध में वो लगातार सम्मिलित था, द्यूत के पासे फेंकने की विद्या में तो वो महारथी था ही, युद्ध के समय तांत्रिक विद्याओं का भी प्रयोग उसे आता था। इस पुस्तक में आपको शकुनि के विषय में भी कुछ अलग जानने को मिलेगा।
घटोत्कच्छ को तो आप जानते ही होगे, एक कार्टून सिरीज़ भी आयी थी उसपर, पर यहाँ जब आप घटोत्कच्छ और उसके पुत्र अंजनपर्व के बारे में पढ़ेंगे तो आप को एक अलग ही कहानी देखने को मिलेगी, और आपको महाभारत में उनका योगदान पता लगेगा। धर्म की जय में क्या योगदान रहा राक्षस वीर घटोत्कच्छ का ये आपको जानना चाहिए। अलयुध राक्षस जो घटोत्कच्छ से बचपन से ही इस लिए ईर्ष्या करता था क्योंकि घटोत्कच्छ की माँ ने राक्षस से विवाह न करके एक मानव से विवाह किया था। ये कहानी आपको तभी पता चल सकती है जब आप महाभारत पढ़ें या फ़िर थोड़े में ज़्यादा जानने की इच्छा हो तो ये पुस्तक पढ़ें।
जयद्रथ की कहानी भी आपको उसके दृष्टिकोण से सुनने में अच्छा लगेगा। जयद्रथ के ही बल पर द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह का निर्माण किया था, क्योंकि जयद्रथ को शिव से वरदान प्राप्त था कि युद्ध के किसी एक दिन अर्जुन को छोड़ अन्य कोई पांडव उसका सामना नहीं कर सकेंगे। इसी कारण से द्रोणाचार्य ने व्यूह के प्रथम द्वार पर उसकी नियुक्ति की।
वैसे तो पुस्तक में आयीं सभी कहानियाँ श्रेष्ठ हैं, पर जब आप भगदत्त और उसके हाथी सुप्रतीक की कहानी पढ़ेंगे तो आपको आश्चर्य होगा कि युद्ध के मैदान में इतने श्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद भी भगदत्त को अन्य महारथियों जैसा नाम प्राप्त क्यों नहीं हुआ?. भगदत्त, नरकासुर का पुत्र था, जिसे सत्यभामा ने कृष्ण के साथ मिलकर मारा था, जब वह सहस्त्रों स्त्रियों का अपहरण कर लिए जा रहा था। इसी कारण से भगदत्त कृष्ण से ईर्ष्या रखता था और इसी से इस युद्ध में उसने दुर्योधन का साथ दिया। वह जब अपने हाथी पर सवार होकर युद्ध के मैदान में आता था, तब ऐसा प्रतीत होता था मानों इंद्र ऐरावत पर विराजमान होकर युद्ध करने आये हों। भगदत्त का सामना युद्ध के मैदान में घटोत्कच्छ, भीम और अर्जुन से हुआ, कृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने ही भगदत्त की जीवन लीला समाप्त की।
इस पुस्तक में आपको महाभारत के ऐसे योद्धाओं के विषय में जानने को मिलेगा, जिनकी बहुत कम चर्चा हुई है, चाहे वह धारावाहिक की बात हो या आधुनिक पुस्तकों की, इन योद्धाओं को कहीं जगह प्राप्त नहीं हुई है।
जयद्रथ और घटोत्कच्छ की कहानी बहुत बार प्रकट हुई है, पर हर बार उसे पढ़ने पर एक अलग ही आनंद प्राप्त हुआ है। इस पुस्तक को लिखने में जिन १० लेखकों ने सहयोग दिया है उन सभी को भविष्य के लिए बहुत शुभकामनाएं और साई स्वरूपा दीदी को भी धन्यवाद जिन्होंने हमारे लिए इन कहानियों का संग्रह किया।
धन्यवाद इंडिक अकैडमी।
Review: युधिष्ठिर

युधिष्ठिर के सच्चे चरित्र को समझाती यह पुस्तक, बहुत ही सरल भाषा में लिखी गयी है, यदि महाभारत जैसा विशाल ग्रंथ पढ़ने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं, तो कन्हैयालाल मानेकलाल मुंशी जी की ७ खंड में उपलब्ध ये कृष्णावतार पुस्तक पढ़कर आप संक्षिप्त रूप में महाभारत का ज्ञान पा सकते हैं।
"ज्ञान योग" में स्वामी विवेकानंद जी के कुछ विचार
१. जो यह कल्पना है कि "मैं इस नदी के तट पर बैठा हूँ, जब सारा पानी समुद्र में पहुँच जायेगा तब मैं नदी के पार जाऊँगा।" वह उतनी ही भूल करता है जितनी कि यह कहने वाला कि, " जब तक पृथ्वी पूर्ण मंगलमय नहीं हो जाती उतने दिन कार्य करते रहने के बाद सुख भोग करूँगा।" दोनों ही बातें असंभव हैं। माया के बीच में से रास्ता नहीं है, माया के विरुद्ध चल कर ही रास्ता मिलेगा, यह बात भी माननी पड़ेगी।
२. पहले था धर्म का कुसंस्कार, अब है विज्ञान का कुसंस्कार; किन्तु पहले के कुसंस्कार के भीतर एक जीवन दायक अध्यात्मिक भाव रहता था, पर आधुनिक कुसंस्कार द्वारा तो केवल काम और लोभ ही उत्पन्न होता है। वह अन्धविश्वास था ईश्वर की उपासना को लेकर और आजकल का अन्धविश्वास है महाघृणित धन, यश और शक्ति की उपासना को लेकर। यही भेद हैं।
३. यदि तुम जगत् का उपकार करना चाहते हो तो जगत् के ऊपर दोषारोपण करना छोड़ दो।
४. तुम सभी ईश्वर हो; हे मानवगण, हे पशुओं, हे सभी प्रकार के जीवित प्राणियों! तुम सभी एक जीवन्त ईश्वर के प्रकाश हो।
५. हम लोगों को आजीवन यह बात सीखनी होगी कि प्रत्येक व्यक्ति के बारे में उसी के आदर्शों के अनुसार विचार करना होगा, दूसरों के आदर्शों के अनुसार नहीं।
संदर्भ : ज्ञान योग - स्वामी विवेकानंद
बुधवार, 27 अक्टूबर 2021
Review: તત્વમસિ
તત્વમસિ by Dhruv BhattMy rating: 5 of 5 stars
સદિયોં થી ચાલી આવતી આપણી પરંપરા જે આધુનિકરણ અને વૈજ્ઞાનિક યુગમાં કોઈનાને માનવામાં ના આવે એવી અનેક દંતકથાઓ છોડી જાયે છે, અને સતત સનાતન એ પરંપરા એમની એમ ચાલી આવે છે. યુગો બદલાયા, વૈજ્ઞાનિક યુગમાં કેટલાક પ્રયોગો પણ થયા, પણ પરંપરા ઉભી ના રહી, એને તો બસ પરિસ્થિતિ અનુરૂપ થોડાઘણા પરિવર્તન કર્યા અને ચાલુ ની ચાલુ રહી. હવે કેટલાક સ્વયંસેવકો આ પરંપરા ને જીવતી રાખવા મેહનત કરે છે. ભારત ના વનમાં રેહવા વાળી પ્રજા સંસાધનો અને કોઈ પણ મદદ વગર પણ વનો ની અંદર આનંદ માં રહે છે, એમના જીવન અને જીવન જીવવાની કળા આ પુસ્તક માં જોવા મળે છે. જ્યાં સ્વાર્થ નહીં, યંત્ર નહીં આધુનિકતા થી દુર, જ્યાં માણસ માં ભરોસો છે, એવા વન ની અંદર પોતાની દુનિયા માં આનંદ થી રેહતી આ પ્રજા જે પ્રકૃતિ ને જ માં માને છે, અને પ્રકૃતિ પણ એમને સંતાન ની જેમ ઉછેરે છે.
માં નર્મદા ની પરિક્રમા વિષય મેં અમૃતલાલ વેગડ ની નર્મદા ત્રય પુસ્તક માં વાંચેલું, અહીં ધ્રુવ ભટ્ટજી એ પરિક્રમા ની યાત્રા અને પરિક્રમા વાશીયો ના માં નર્મદા માં પર વિશ્વાસ ની બાત કરી છે.
તમને આ પુસ્તક વાંચીને ભારત ની વનવાસી પ્રજા અને માં નર્મદા ની આસ પાસ ના ડુંગરો વિષય ઘણી જાણકારી મળી રેહશે ....
નર્મદે હર ....
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Review: Samudrantike
Samudrantike by Dhruv BhattMy rating: 5 of 5 stars
સમુદ્ર કિનારા પર રહેનારા માણસો અને તેમના જીવન વિષય ની કેટલીક બાતો જાણવા મળી. સમુદ્ર ના ખારા પાણી ને ભી પૂજતા અને દેવતા માનતા લોકો ને જોયા, એમની શ્રદ્ધા ને જોયા. એક એવી સ્ત્રી ની કથા જાણવા મળી કે જે અન્નપૂર્ણા છે, એક એવા સન્યાસી ની વાર્તા આવી કે જે પ્રકૃતિ જોડે સંવાદ સાધતા જાણતો. ગ્રામજનોની એવી સુંદર પ્રકૃતિ ની જાણ થઈ જ્યાં એમના માટે કોઈ પરાયુ નહીં બધા એમના ગ્રામ માં જે આવે એ એમના મહેમાન ગણાયે. ધ્રુવ ભટ્ટ ની આ બીજી રચના વાંચું છું, માનવો ના વ્યવહાર અને એમના જીવન વિષય ગેહરાઈ થી એમને લખ્યું છે.
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Review: उफ्फ कोलकाता

Review: Main Munna Hun

Review: Gandhi Ki Sundarata । गाँधी की सुंदरता

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021
Review: Makers of Modern Dalit History

महात्मा गाँधी
पुस्तक - दिग्विजय : गुरुदत्त
दिग्विजय [Digvijaya] by गुरुदत्त My rating: 5 of 5 stars भगवान आदि शंकराचार्य जी ने पवित्र भारत भूमि के चारों दिशाओं की यात्रा कर वहाँ स्...
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Chandpur Ki Chanda । चाँदपुर की चंदा by Atul Kumar Rai My rating: 5 of 5 stars ग्राम जिसमें एक समाज रहता है, उस समाज के युवा जब राजनीति...
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दिन की थकान लिए भारी हुए कंधे, शाम को एक साथी की चाह रखते ही हैं, जो उन्हें संभाल सके । जीवन की भागदौड़ में जब वह साथी नहीं मिल...
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Kulhad Bhar Ishq: Kashishq by Koshlendra Mishra My rating: 4 of 5 stars ठीक ठाक शब्दों का इश्क हिसाब से लिखे गए शब्दों का उफान मारता इश्क...