शनिवार, 30 अक्टूबर 2021

समीक्षा: गंजहों की गोष्ठी

गंजहों की गोष्ठी

गंज श्रीलाल शुक्ल जी की व्यंग्य रचना 'रागदरबारी' का केंद्र स्थल है, जहाँ के जन ख़ुद को गंजहे कहलाना पसंद करते हैं। गंज की कहानी गांव और शहर की है जहां व्यवस्था समाज में घर कर चुकी है, और चूंकि व्यवस्था बन चुकी है तो लोग भी ख़ुद को उस हिसाब से ढाल चुके हैं, इन्हीं गंजहों की कहानी और राजनैतिक व्यंग्य था 'रागदरबारी'.

साकेत जी 'गंजहों की गोष्ठी' करवा रहे हैं जिसमें आज की राजनैतिक व्यवस्था को लेकर चर्चा केंद्र में है, और बहुत ही व्यंग्यात्मक लेखनी के साथ साकेत जी ने हमारे लोकतंत्र की वर्तमान व्यवस्था का वर्णन किया है।

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