ईसा के आरंभ से पहले से आक्रांताओं के हमले हो रहे थे भारत पर लगातार। सैन्य शक्ति का लगातार ह्रास हो रहा था। ७०० में इस्लाम के आगमन के बाद उन्होंने धर्म परिवर्तन वाली नीति को बढ़ावा दिया, जिससे उनकी सैन्य शक्ति तो लगातार चहुं दिशा में बढ़ रही थी, आपकी कम होती जा रही थी।
एक स्थायीत्व की आवश्यकता उस समय थी और वो अकबर और राजा भारमल द्वारा की गयी संधि से प्राप्त हुआ। अकबर को भी राजपूतों की सहायता की आवश्यकता थी क्योंकि उज़्बेक, अफ़ग़ान सत्ता से उसे लगातार चुनौती मिल रही थी।
अफ़गानों को रोकने के लिए मुग़ल और राजपूत दोनों की संयुक्त शक्ति की उसे ज़रूरत थी। इस कारण मुग़ल किसी भी शर्त पर राजपूतों के साथ संधि करने को तैयार थे। दोनों को ही एक दूसरे की ज़रूरत थी। इसलिए मेरे अनुसार तो वह भारत के लिए सबसे योग्य समय था जिसने इस्लाम गति को कुछ समय के लिए रोक दिया।
बाक़ी हम आधुनिक युग में भी देख चुके हैं, जब हमें पाकिस्तान और बांग्लादेश को भारत से अलग करना पड़ा। वो युद्ध न रूकते तो ये दशा इससे भी बद्दतर होती।


