
बहते जाना है और बस समुद्र में जाकर समा जाना है"
जीवन नदी के प्रवाह सा है, जो बहते हुए समुद्र की गहराइयों में जाकर एक दिन सिमट जाता है, और फ़िर वह भी सागर हो जाता है। इस प्रवाह में अनेक पत्थर, पहाड़ आते हैं, पर नदी के प्रवाह को नहीं रोक पाती, वह बस उसे मोड़ सकते हैं अथवा रास्ता बदलने पर मजबूर कर सकते हैं, पर उसे रोक नहीं पाते। क़भी क़भी प्रवाह इस वेग् से बहता है कि वह पत्थर , पहाड़ सबको अपने साथ बहा ले जाता है।
मानव जीवन में ऐसे पत्थर और पहाड़ अनेक हैं, अनेक चिंताये उसे घेरे रहती हैं। पर मानव उन सबसे मुक्त होने को संध्या का इंतज़ार करता रहता है। कुछ प्रेम भरे शब्दों से थकान मिट जाती है, तो क़भी दुःख भी दे जातें हैं कुछ शब्द।
जीवन की इन्हीं सब उधेड़बुन को शब्दों में ढ़ालने की जादूगरी ही तो है "मोजेक"। जीवन के कई रंगों को शब्दों और चित्रों में इतनी सुंदरता से इस पुस्तक में उतारा गया है, आप इस शब्द और चित्र की दुनियां में कहीं गहरे उतरते जाते हो।
कुछ कवितायें आनंद करातीं है, तो कुछ आपको प्रेरित करती हैं लक्ष्य को निर्धारण करने की ओर। इन छोटी छोटी कविताओं में गहरे उतरते जाइये,आप इनमें अपने आप को भी कहीं पा ही लेंगे। चित्रकार ने इन शब्दों से जो दृश्य रचे हैं, वे आपको शब्दों में ओर उतरने और उन्हें समझने में सहायक है।
कुछ शब्द छाप छोड़ते हैं, मैं एक दो लिख देता हूँ
"Ignorance, or mistake
It's all embroidery now."
"Accept me as I am -
With my mistakes, and all my colours!
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