रविवार, 16 अक्टूबर 2022

पुस्तक समीक्षा

यात्रा वृतांत हो, कोई प्रसंग सुनाना हो या कथा कहने का गुण हो, तृषार जी अपनी प्रतिभा से अचंभित हुए बिना नहीं रहा जाता। उनकी कथा कहने की जो शैली है वह पाठकों को कथा के साथ बांधे रखती है।

किसी गांव की कच्ची सड़क पर रात के सन्नाटे में निकलने का पूरा दृश्य जिस तरह उन्होंने अपनी कथा में बताया है, उसकी अनुभूति आपको होने लगती है।

कथा एक ऐसा रोमांच उत्पन्न करती है जिसका रहस्य जानने के लिए हम नायक के साथ साथ चलते जाते हैं। जब रहस्य प्रकट होता है तो हमें यह ज्ञात होता है कि कैसे अतीत के काले साये आज भी हमें अपनी सत्ता से दबाए हुए हैं।

अतीत में जिन्हें अत्याचार के बल से छीना था, उन संसाधनों पर आज भी वह अतीत किसी साये के रूप में अपना कब्ज़ा जमाए हुए है।

कथा केवल रोमांच और रहस्य ही होकर नहीं गुजरती है, वह उस सच्चाई से भी परिचय करवाती है, जो हमारे सामने वर्तमान में समस्या बनकर खड़ी है।

पढ़िए एक छोटा सा कथानक है, आपको पढ़कर अच्छा लगेगा।

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