गुरुवार, 1 सितंबर 2022

क्रांतिदूत तृतीय भाग मित्रमेला - मनीष श्रीवास्तव

Krantidoot #MitramelaKrantidoot #Mitramela by Manish Shrivastava
My rating: 5 of 5 stars

क्रांतिदूत शृंखला का तृतीय भाग आपको सावरकर के संकल्प से परिचित कराती है। संकल्प जो उन्होंने अपने बचपन में माँ अष्ट भवानी के सामने लिया था कि वह अपना जीवन राष्ट्र सेवा में खपा देंगे। उसी संकल्प लेने के क्षण को पुस्तक अपने आवरण पृष्ठ पर जगह देती है। सावरकर के बचपन के किस्सों से शुरू हुआ अध्याय, उनके संकल्प से संगठन तक के सफ़र पर लिए चलती है। मित्रमेला जो एक संगठित दल था और जिसकी भावना केवल राष्ट्र सेवा से ओतप्रोत थी, वही दल विदेश यात्रा करते हुए जब लंदन पहुँचता है, तब अभिनव भारत को जन्म देता है।
पुस्तक पढ़कर आप सावरकर के जीवन के कुछ विस्मृत अध्यायों को जान सकेंगे और एक राष्ट्र प्रेम की भावना आपके भीतर भी जल उठेगी।
वंदेमातरम् .....

View all my reviews

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पुस्तक - दिग्विजय : गुरुदत्त

दिग्विजय [Digvijaya] by गुरुदत्त My rating: 5 of 5 stars भगवान आदि शंकराचार्य जी ने पवित्र भारत भूमि के चारों दिशाओं की यात्रा कर वहाँ स्...